लक्ष्य और मूल्य
हमारा सनातन इतिहास बताता है कि यह सबसे पुरानी धार्मिक परंपरा है जो जीवन के शाश्वत सत्य, धर्म, कर्म और मोक्ष पर केंद्रित है. इसके मूल में वैदिक परंपरा है और यह वेदों, उपनिषदों, महाभारत और रामायण जैसे ग्रंथों में पाया जाता है. यह एक सहिष्णु और लचीला दर्शन है जो व्यक्तिगत आध्यात्मिक विकास के लिए भक्ति, ज्ञान और कर्म योग जैसे विभिन्न रास्ते प्रदान करता है|
सनातन इतिहास के मुख्य बिंदु:
सनातन का अर्थ: यह ‘हमेशा रहने वाला’ या ‘शाश्वत’ है, जिसका अर्थ है कि इसकी कोई शुरुआत या अंत नहीं है.
प्राचीन जड़ें:
सनातन धर्म दुनिया की सबसे पुरानी आध्यात्मिक परंपराओं में से एक है, जिसकी जड़ें 5,000 साल से भी पहले की हैं और यह सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ी हुई है.
पवित्र ग्रंथ:
इसका ज्ञान वेदों, उपनिषदों, रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों में समाहित है.
धर्म, कर्म और मोक्ष:
यह धर्म (कर्तव्य), कर्म (कार्य और उसके परिणाम), और मोक्ष (मुक्ति) जैसे सिद्धांतों पर जोर देता है.
सहज और लचीला:
यह एक सार्वभौमिक और सहिष्णु परंपरा है जो लोगों को व्यक्तिगत आध्यात्मिक मार्ग चुनने की स्वतंत्रता देती है.
सांस्कृतिक महत्व:
सनातन धर्म भारतीय संस्कृति का आधार है और इसे जीवन शैली के रूप में देखा जाता है.
मुख्य शिक्षाएँ:
आत्म-ज्ञान:
मानव जीवन का उद्देश्य आत्मा (आत्मा) और परमात्मा (ब्रह्म) को समझना और अनुभव करना है.
जीवन के चरण (आश्रम):
ब्रह्मचर्य (छात्र जीवन), गृहस्थ (गृहस्थ जीवन), वानप्रस्थ (वन में निवास) और संन्यास (त्याग) जीवन के महत्वपूर्ण चरण हैं.
योग के मार्ग:
भक्ति योग (प्रेम और भक्ति), ज्ञान योग (ज्ञान) और कर्म योग (निस्वार्थ कर्म) व्यक्तिगत विकास के मार्ग हैं|
श्रीमद्भगवद्गीता में परमात्मा को सनातन तो माना गया है। साथ ही जीवात्मा को भी सनातन धर्म के रूप में स्वीकार किया गया है अर्थात् कहने का तात्पर्य यह है कि सनातन धर्म में सभी चीजें सनातन हैं और यह अनादिकाल से हैं।इसे विश्व का प्राचीनतम धर्म माना जाता है। इसे ‘वैदिक सनातन वर्णाश्रम धर्म’ भी कहते हैं जिसका अर्थ है कि इसकी उत्पत्ति मानव की उत्पत्ति से भी पहले से है।
विद्वान लोग हिन्दू धर्म को भारत की विभिन्न संस्कृतियों एवं परम्पराओं का सम्मिश्रण मानते हैं जिसका कोई संस्थापक नहीं है।
हमारे सनातन मैं लगातार पूर्व मैं आक्रांताओं( मुग़लों और अंग्रेजों )ने आक्रमण किया था फिर भी वो हमारी सनातन संस्कृति को खत्म नहीं कर पाये।
वर्तमान मैं भी जिस तरह से पश्चिम का गलत प्रभाव हमारे समाज के अचार और व्यवहार मैं पड़ रहा है उसके लिये बहुत सारे लोग और संस्थाएँ काम कर रहे हैं जिससे हमारा समाज जिसका आधार सनातन है प्रग़ातिशील रहे।
स्वदेश भारती भी अपनी एक आहुति इस सामाजिक(सनातनी) सुधार मैं डाल रही है
और हमारा प्रयास था और हमेशा रहेगा कि हम भी देश और समाज के लिये कुछ अच्छा और प्रेरणादायक कर पायें।